इस अपार्टमेंट के 8वे फ्लोर पे कोई क्यूँ नहीं रहता?

आज भूतों का त्योहार ‘हेलोवीन’ पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं। इस मौके पर हम आपको मुंबई के ग्रैंड पैराडी टावर्स के बारे में बताने जा रहे हैं। कहा जाता है कि यहां अब तक 20 लोग अतृप्त आत्माओं का शिकार बन चुके हैं। ग्रैंड पैराडी टावर्स की कहानी …

मुंबई में सबसे मशहूर और सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक में स्थित है ग्रैंड पैराडी टॉवर जिसे ग्रैंड पैरारी के नाम से भी जाना जाता है। पिछले कुछ सालों में इसकी की 8वीं मंजिल पर बने कैंप्स कॉर्नर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। एक श्रृंखला में होने वाली मौतों और इमारत में दुर्घटनाओं का एक भीषण पैटर्न बनने के कारण आज भी लोग हैरत में हैं।

2004 से शुरू हुआ खूनी खेल

इन बुरी घटनाओं का दौर शुरू हुआ 2004 से जब एक बुजुर्ग दंपति इस अपार्टमेंट की खिड़की से बाहर कूद गया। मामला यहीं नहीं रुका और एक साल के अंदर ही उनके बच्चों और उनके पोते ने ठीक उसी तरह खिड़की से कूदकर आत्महत्या कर ली।

अतृप्त आत्माओं के निवास का यकीन

30 साल से इमारत में रह चुके निवासियों ने बताया कि एक घर में रहने वाले पूरे परिवार की तीन पीढ़ियों का एक ही तरीके से आत्महत्या करना हमारे तर्कसंगत मन को अस्वीकार्य था। पर इन घटनाओं से यहां अनिष्ट ताकतों के होने का प्रमाण मिलता है।

सामने आ चुके हैं 20 से ज्यादा मामले

इमारत का 1976 में निर्माण किया गया था। इसके बाद से घातक दुर्घटनाओं और आत्महत्या के 20 मामलों में वहां के रहवासियों को हिला कर रख दिया। – यहां कई लोगों ने बच्चों समेत खिड़की से कूदकर आत्महत्या की। कुछ घरों में तो नौकरानियों ने भी उसी तरीके से आत्महत्या कर ली, जिससे एक बात तो साफ हो गई कि इन सभी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के पीछे बुरी ताकतों का हाथ है। इन सभी घटनाओं पर विराम लगाने के लिए सोसाइटी के लोगों ने मिलकर फिर पूजा और यज्ञ-हवन करवाया। इसके बाद इन घटनाओं पर विराम लग गया। मगर आज भी 8वीं मंजिल का उस फ्लैट में रुकने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता है।

मुंबई में हैं कई हांटेड प्लेस

सिर्फ यही नहीं मुंबई के आसपास स्थित ऐसे कई हांटेड इलाके हैं जहां शाम के बाद कोई कदम नहीं रखता, वर्ना हो जाता है कुछ अनर्थ । धुप्प अंधेरा, चारों ओर पसरा सन्नाटा, अनदेखी-अनसुनी आवाजें और कुछ अनिष्ट होने की आशंका इन इलाकों की पहचान बन चुकी हैं।

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