दोपहर मे मत भरवाइये पेट्रोल और डीज़ल वरना पड़ेगा महंगा

क्यों आपको दोपहर को पेट्रोल नहीं भरवाना चाहिए |

पेट्रोल मिलने का नाप आयतन से होता है।

लेकिन पेट्रोलियम मार्केटर्स एसोसिएशन ऑफ अमेरिका के पूर्व अध्यक्ष क्रेग ईरेक्स का कहना है कि दिन के तापमान में बदलाव के कारण गैसोलीन का विस्तार और संकुचन उपभोक्ता के लिए न के बराबर है।

कैलिफ़ोर्निया एडवोकेसी ग्रुप कंज्यूमर वॉचडॉग के अनुसंधान निदेशक जूडी दुगन कहते हैं कि आज के डबल-वाल टैंक्स गैसोलीन को उसी तापमान पर रखते हैं जिस पर वह डिलिवर होता है। एक प्रयोग में उन्होंने पाया कि जब कि दिन तापमान में बारह डिग्री का बदलाव आया भूमिगत टैंक पेट्रोल में कोई बदलाव नहीं आया।

यह रिपोर्ट अमेरिका की है। लेकिन भारत में भी भूमिगत टैंक जमीन के काफी नीचे होता है। उसमें और बाहर की हवा के बीच जमीन की मोटी सी परत होती है। बाहर के तापमान का असर नीचे टैंक के पेट्रोल पर बहुत ही कम होता है।

इसके अतिरिक्त अध्ययन से पाया गया है कि १०.५ डिग्री सेल्सियस तापमान बदलने से पेट्रोल के आयतन में केवल एक प्रतिशत का फर्क पड़ता है। अब मान लेते हैं कि सुबह और भरी दोपहर के तापमान में हवा में बीस डिग्री सेल्सियस का अन्तर हो जाता है। मेरे अंदाजे से भूमिगत पेट्रोल में दो या तीन डिग्री से अधिक अंतर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब पेट्रोल के आयतन में आधा प्रतिशत से भी कम अंतर पड़ेगा।

(सम्पादन – यानि एक हज़ार रुपए का पेट्रोल या डीज़ल डलवाने पर केवल दो या तीन रुपए का अंतर)

अब इतने कम फायदे के लिए हम अपना पेट्रोल पम्प का चक्कर प्लान करेंगे तो फायदे से नुक्सान अधिक होगा।

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